Tuesday, 11 April 2017

मैं शुन्य पर सवार हूँ - BY ZAKIR KHAN

मैं शुन्य पर सवार हूँ - BY ZAKIR KHAN

मैं शुन्य पर सवार हूँ ,
मैं शुन्य पर सवार हूँ ,
बे अदब सा मैं खूमार हूँ,
अब मुश्किलो से क्या डरु,
मैं ख़ुद केहर हज़ार हूँ ,
 मैं शुन्य पर सवार हूँ। 

यह ऊँच नीच से परे ,
मजाल आँख में भरे ,
मैं लड़ पड़ा  हूँ रात से ,
मशाल हाँथ में लिए ,
ना सूर्य मेरे साथ है , 
तोह क्या नई यह बात हैं 
वह श्याम को है ढल गया 
वह रात से था डर गया  
मैं जुगनुओं  का यार हूँ ,
मैं शुन्य पर सवार हूँ। 

भावनाएँ है मर चुकी ,
संवेदनाएं  हैं ख़त्म हो चुकी,
अब  दर्द  से क्या डरूं ,
यह जिंदगी ही जख्म है ,
मैं रहती मात हूँ ,
मैं बेजान स्याह रात हूँ,
मैं काली का श्रृंगार हूँ, 
मैं शुन्य पर सवार हूँ। 
मैं शुन्य पर सवार हूँ।

हूँ राम का सा तेज मैं,
लंका पति सा ज्ञान हूँ ,
किसकी करू मैं आराधना ,
सबसे जो मैं महान हूँ ,
ब्रम्हांड  का मैं सार हूँ ,
मैं जल प्रवाह निहार हूँ,
मैं शुन्य पर सवार हूँ। 
मैं शुन्य पर सवार हूँ।  


Monday, 19 September 2016

"परिवर्तन - एक नई पहल"


आदरणीय मित्रों नमस्कार,
                                    आप सभी को यह बताते हुए काफी ख़ुशी हो रही है कि जल्द ही हम शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शशक्तिकरण के लिए एक गैर सरकारी संगठन (NGO) कि नीव रखने जा रहे हैं जिसका नाम "परिवर्तन - एक नई पहल" होगा | हम आशा करते है कि आप सभी हमारा साथ देंगे | यदि आप हमारी संस्था से जुड़ना चाहते हैं तो आप हमसे सीधे संपर्क कर सकते हैं |
               
                धन्यवाद
                                                                                आपका
                                                                              गौरव सिंह
                                                                            8802286871

Monday, 5 September 2016

गुरु का महत्व


गुरु का महत्व कभी होगा न कम ,
भले कर ले कितनी भी उन्नति हम ,
वैसे तो है इन्टरनेट पे हर प्रकार का ज्ञान ,
पर अच्छे बुरे की नहीं है उसे पहचान |
नहीं हैं शब्द कैसे करूँ धन्यवाद ,
बस चाहिए हर पल आप सबका आशीर्वाद ,
हूँ जहाँ आज मैं उसमे हैं बड़ा योगदान ,
आप सबका जिन्होंने दिया मुझे इतना ज्ञान |
आपने बनाया है मुझे इस योग्य ,
की प्राप्त करूँ मैं अपना लक्ष्य ,
दिया है हर समय आपने सहारा ,
जब भी लगा मुझे की मैं हारा |
पर मैं हूँ कितना मतलबी ,
याद किया न मैंने आपको कभी ,
आज करता हूँ दिल से आप सब का सम्मान ,
आप सब को है मेरा सत सत प्रणाम |

Thursday, 16 June 2016

मेरे सवालों का अच्छा जवाब छोड़ गई


मेरे सवालों का अच्छा जवाब छोड़  गई |
वो मेरी मेज पर अपनी किताब छोड़ गई ||

याद आती हैं मुझको उसकी बातें बहुत |
मेरे जहन मे वो अपने जज्बात छोड़ गई ||

लिख कर मेरी मेज पर गालिब की शायरी |
न जाने दिल के कितने हिसाब छोड़ गई ||

साथ ले गई अपने सारे गुलशन  की खुशबू |
बस मेरी किताब मे एक सूखा गुलाब छोड़ गई||

वो खुद जाकर सो गई सुकून की नींद |
मेरी जगती आँखों मे ख्वाब छोड़ गई ||
#_gaurav